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नवंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

किराए की माँ

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 खलारी की पहाड़ियों में 1997 की सर्दियाँ आ चुकी थीं। सुबह कोहरे का प्रकोप के कारण ,10 बजे की, मुख्यालय भेजी जाने वाली रिपोर्ट में , Loss of Production  due to fog , का जिक्र प्रमुखता से होने लगा था। उस दिन सुबह  चेक पोस्ट से गुजरते समय, मैं थोड़ी देर रुका था। सुजय तिवारी, चेक पोस्ट पर मुंशी के तौर पर ड्यूटी पर थे। खदान के प्रबंधकों की दिनचर्या में , चेक पोस्ट पर थोड़ी देर रुक कर खदान और समाज की रिपोर्ट लेना, एक अहम पहलू होता है। चेक पोस्ट एक हिसाब से खदान का नर्व सेंटर होता है। वहाँ हर शिफ्ट में जमा होने वाले, स्टाफ, ठेकेदारी कर्मचारी, ड्राइवर, पे लोडर आपरेटर , खैनी की चुटकी के साथ आस पास की कालोनियों में होने वाली उथल पुथल भी बांटते हैं। गोया यूं , आपने सुबह का अखबार न भी पढ़ा हो, तो भी समाचारों से महरूम न रहेंगे। सुजय ने खदान में चल रही मशीनों की जानकारी दी। रात पाली में अच्छा ट्रिप निकला था। कोहरे के बावजूद, रात पाली जल्दी शुरू कर पूर्वार्ध में ही ज्यादा कोयला निकाल लिया गया था। अमूमन चार बजे सुबह से आठ बजे तक कोहरा आ जाता है, उस समय खदान से निकलते टिप्पर धीमी गति...

कौन जाने, मौका मिलेगा , या नहीं ..

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निःशब्द, निश्चल पड़ी उसकी काया, प्राण अभी बाकी थे। अस्पताल से घर लौट भी सकता था, या जीवन मुक्त भी हो सकता था। मन भाग रहा था। स्मृति डोर पर.. एक से दूसरी, दूसरी से तीसरी याद ही याद .. दौड़ भाग के बाद, मन वकील बन बैठा क्या खोया, क्या पाया क्या कर सकता था, क्या किया.. एक और आरोप, उस दिन टहलते हुए उसने भी तो एक अदालत लगाई थी। बच्चों की मनमानियों को बिन्दु की तरबीयत में कोताही पर मढ़ दिया था। सुबह दोनों पति पत्नी टहलने निकले थे। लौटते हुए एटीएम से पैसे निकालने थे। रास्ते भर वह झिकता रहा था। बिन्दु सुनती रही । अपनी धुन में जब वह आगे जाने लगा, तो, बिन्दु ने टोका - एटीएम तो पीछे छूट गया। तीखी नजरों से बिन्दु को देख वह झिड़क पड़ा , "बच्चे तो संभलते नहीं हैं, बाकी सब जानती हो।" तीर सीधा कलेजे पर लगा बिन्दु बिंध गई। आँखों में आँसू भर, एक नजर उसने उसे देखा और, पलट कर घर लौट गई एटीएम से रुपये निकाल कर थोड़ी देर से वह घर आया। उसकी चाय बिस्किट और दवाइयाँ टेबल पर रखे थे। बिन्दु के हाथ में चाय का प्याला तो था, पर आंखे सूनी थी। उदास खामोश.. सुबह ऑफिस जल्दी जाना था, सो चला गया। अब सोच रहा है, अगर ...