किराए की माँ
खलारी की पहाड़ियों में 1997 की सर्दियाँ आ चुकी थीं। सुबह कोहरे का प्रकोप के कारण ,10 बजे की, मुख्यालय भेजी जाने वाली रिपोर्ट में , Loss of Production due to fog , का जिक्र प्रमुखता से होने लगा था। उस दिन सुबह चेक पोस्ट से गुजरते समय, मैं थोड़ी देर रुका था। सुजय तिवारी, चेक पोस्ट पर मुंशी के तौर पर ड्यूटी पर थे। खदान के प्रबंधकों की दिनचर्या में , चेक पोस्ट पर थोड़ी देर रुक कर खदान और समाज की रिपोर्ट लेना, एक अहम पहलू होता है। चेक पोस्ट एक हिसाब से खदान का नर्व सेंटर होता है। वहाँ हर शिफ्ट में जमा होने वाले, स्टाफ, ठेकेदारी कर्मचारी, ड्राइवर, पे लोडर आपरेटर , खैनी की चुटकी के साथ आस पास की कालोनियों में होने वाली उथल पुथल भी बांटते हैं। गोया यूं , आपने सुबह का अखबार न भी पढ़ा हो, तो भी समाचारों से महरूम न रहेंगे। सुजय ने खदान में चल रही मशीनों की जानकारी दी। रात पाली में अच्छा ट्रिप निकला था। कोहरे के बावजूद, रात पाली जल्दी शुरू कर पूर्वार्ध में ही ज्यादा कोयला निकाल लिया गया था। अमूमन चार बजे सुबह से आठ बजे तक कोहरा आ जाता है, उस समय खदान से निकलते टिप्पर धीमी गति...