सुबह सवेरे
सुबह सवेरे टहलते हुए, दिखती हैं बंद खिड़कियां खाली बालकोनी, सूने छज्जे मकान बिकते हैं Sea Facing, Lake Facing Best View Mountain view न जाने कितने वादों के साथ बात दीगर है, आज तक दिखा नहीं कोई बैठा सुकून के साथ चाय का प्याला, सुबह का अखबार, सहचरी का साथ सुनहरी धूप, मंद समीर जीवन की आपाधापी निगल लेती है सब कुछ क्या हुआ, क्या हो सकता था क्या होगा , तीन प्रश्नों में उलझा मन टालता है, फुरसत के क्षण कभी सप्रयास ही सही, या, यूं ही, बैठें, उनके साथ थामें हाथ, और, कभी तो कहें भाँड़ में जाए दुनिया और, दुनिया के गम हम - तुम हैं साथ साथ इस क्षण में, एकांत.. सुबह की चाय, के साथ, कुछ समय तो बिताएं, Terrace पर... आज