साथ चले

 


साथ चलें

साथ ही साथ चले

साथ ही साथ रहे,

रहे भी पर रहे नहीं

 

मैं अपनी नौकरी में

और तुम बच्चों में

इतने मशगूल हुए हम,

कि बातें ही चूक गईं

 

सब उड़ चले,

अपने आशियाने,

घोंसला हुआ वीरान,

 

अब तो चलें हम भी

साथ साथ,

अपने गगन की तलाश में,

आसमान में तारे गिनें,

सुबह सवेरे कलरव सुने।

साथ साथ रहें, साथ साथ जिएं

सँजो लें यादें,

फिर मिलने के वादे के साथ,,,   


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Spence's Hotel - (Calcutta 1931)

राज ज्योतिषी -३ (अंतिम भाग)