दास्तान ए जिंदगी
घोंसला खाली था।
बच्चे उड़ चले थे ।
तोता और तोती अकेले रह गए थे। बूढ़े हो गए थे।
तोता शाम को घोंसले आता भी, तो अपने में खोया रहता।
तोती को वो दिन याद आते थे, जब दोनों, एक साथ सूरज का उगना डूबना देखते थे।
और, रात को सुनहरे तारे गिनते थे..
बात करना भी दूर, अब तो , तोती के पास भी आने से , तोता चौंक पड़ता था।
रिश्ता अब खाने पीने और सोने में सिमट गया था।
उस दिन तोती खूब लड़ी। घोंसला छोड़ कर खुद की जिंदगी तलासने का फैसला सुनाया।
आज, तो बस वो ही दिन था ।
उस दिन, तोता इधर उधर घूमता रहा। शाम ढले घर आया तो देखा , तोती घर पर ही थी। पिंजरा खुला था पर उड़ नहीं सकी।
उसने शादी वाली चूड़ी पहनी थी। खाना भी तोते के पसंद का ही बनाया था।
उसने शादी वाली चूड़ी पहनी थी। खाना भी तोते के पसंद का ही बनाया था।
उस रात तोता निश्चिंत हो कर सोया।।

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