मुंडेर पर गिद्ध
राम खेलावन जी ने एक चुटकी खैनी करीने से निचले होंठ और दांतों के बीच में दबा कर चिंतित स्वर में कहा - पता नहीं कब खदान से कोयला आएगा। लगता है, आज भी शाम ढले तक बक्सा भरते रहेंगे। चिंता की लहर सभी के चेहरों पर , झुर्रियों के बीच फिसलते चली गई।
कोलियरी के वैगन लोडर गैंग की यह रोजमर्रा की बात थी। कोयले का इंतज़ार।। कुछ चतुर सुजान गैंग लीडर रात को ही टिप्पर चालकों और खलासी बंधुओं के साथ सेटिंग करके सुबह सुबह कोयले का इंतेजाम कर लेते थे। राम खेलावन आज चूक गए थे।
माहौल को ठंडा करते हुए बिसेसर ने गमछे को फटकार कर माथा में बांधते हुए कहा - राम खेलावन भैया, खुश रहिए, आज रैक लोड नहीं होगा।
बाकि साथी हंस पड़े। बिसेसर वा पगला गया है। भविष्य बता रहा है।।
कुछ ही देर में पायलट इंजन की सिटी सुनायी पड़ी। उलटे तरफ से रैक ठेलते हुए पायलट सिटी पर सिटी मारता हुआ आ रहा था।
जैसे ही रैक का पहला बक्सा साइडिंग में घुसा .. यह क्या..
बिसेसर नीचे रेल लाइन पर कूद गया। मजदूरों की आँखें बंद हो गई। जब खुली, बिसेसर तीन टुकड़ों में बंटा हुआ था। गमछा वैसे ही सर पर बंधा था। आँखें खुली थी..
अफरा तफरी मच गई।
लाश निकालने, मृत्यु पर्यंत मुआवजा जल्दी से जल्दी देने में प्रबंधन लग गया,
और बिसेसर की घरवाली रामरती को सम्हालने की रौं में समाज लग गया..
जितने मूँह, उतनी बातें।
पूरी कोलियरी जैसे इसी घटना से ओत प्रोत हो गई। ऑफिस, खदान, साइडिंग, सब्स्टैशन सब जगह इसी घटना के चर्चे थे।
जब कोलाहल थमा , दुर्घटना कहानी में बदल गई थी।
कहानी की शुरुआत विसेसर और नव विवाहिता राम रती के पलामू जिले से खलारी आने से शुरू हुई।
विसेसर गबरू जवान तो था ही, चैता विरहा भी अच्छा गाता था। राम रती के आने से खाने पीने का आराम हो गया। महफिलें जमने लगी।
कभी कभी मुंशी जी भी आने लगे। उनका आना जाना बढ़ता ही गया।
कब राम रती भी बह गई, पता ही नहीं चला।
विसेसर नें किनारे को बांधने के बजाए , खुद ही निकल जाना उचित समझा।
मुआवजे की मोटी रकम और विसेसर की जगह परमानेंट नौकरी के साथ रामरती के दिन और भी बहूरे..
मुंशी जी की मोटर साइकिल अभी भी गाहे बगाहे वहाँ देखी जाती रही।
देखने वालों नें मुंडेर पर गिद्ध भी देखा था..

शीर्षक को सार्थक करती आपकी ये लघुकथा। बिसेसर का पलायन चुभ गया ...
जवाब देंहटाएंमानव मन अपरिमित संभावनाओं के बावजूद दो ही विकल्पों मे उलझा रहता है - Fight or Flee.
हटाएंमजबूत मन वाले मानते हैं - कुछ तो कर, युही मत मर
कमजोर मन वाले रास्ता छोड़ जाते हैं।
आपके कमेन्ट से मेरा उत्साहवर्धन हुआ। धन्यवाद।