मैं भगवान, बोल रहा हूँ
मैंने पूछा, भगवान,
तूने दिया ही क्या है?
उसने कहा -
तूने मांगा तो बहुत था,
पर चाहा क्या था?
राह तुम्हारी थी,
चले भी तुम, थे
विकल्प भी तुम्हारे थे,
निर्णय भी तुम्हारा था,
प्रारंभ भी तुम्हारा था,
तो अंत भी,
तुम्हारा ही, तो होगा
मैंने तुम्हें अपना अक्स दिया,
ताकत दी,
मोहलत दी,
अब,
परिणाम पर पहुँच कर
निष्कर्ष तो मत थोपो।
आगे और जाना है,
सुधर जाना,
परिणाम बदल जाएंगे,
निश्चिंत रहो,
मैं, बोल रहा हूँ।।

सरल और सधे हुए शब्दों में सुंदर अभिव्यक्ति, साधुवाद..☺️☺️
जवाब देंहटाएंसुन्दर अभिव्यक्ति 👍
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