दादू और पोती

 

सर्दियों की एक शाम
बीत रही थी, यूँही

पोती ने दादू से कहा,
Dadu, Let us go to Beach
दादू ने पूछा कहाँ है, Beach
पोती ने कहा – वहाँ वो देखो
दादू को Beach नहीं,
ढलती शाम दिखी

पोती ने कहा, दादू चलो, चलो न दादू
दादू को खड़े हो सोचते देख
पोती ने सुझाया
Dadu, Just Pretend, and start

Pretend beach पर पहुँच कर,
पोती ने लगाया Sun Screen lotion
और, Beach Chair पर लेट गई
पीछे से दादू आए
तो उन्हे भी लगाया Sun Screen Lotion

कुछ देर बाद दादू और पोती
खेलते रहे Beach Ball से
उल्लास के अतिरेक में पोती
मस्त मगन नाचती रही

पोती के साथ कुछ पल बीता कर
दादू को भी सुनाई दे रहा था
सागर की लहरों का शोर
दादू और पोती घंटों गोते लगाते रहे
उस समुंदर में,
जो था,
पोती की कल्पना में,
दादू के अहसास में,

उस दिन दादू ने समझा मतलब,
कबीर की उक्ति का,
मन चंगा तो कठौती में गंगा...

पोती अगले खेल की तरफ बढ़ चली थी।


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