बंदर तो बंदर है।।।
ध्यान से देखें विवाह के आयोजन को जब एक बंदर धूम धाम से बनता है दूल्हा वहीं कुर्सियों पर बैठी महिलायें नजर रखती हैं अपने बंदरों पर बंदर अगर सफल हो, शिष्ट हो आदेश परस्त हो तो जीवन सफल मुस्कान ही मुस्कान अन्यथा कुढ़न ही कुढ़न दूसरी तरफ हुए बंदर सभी आजाद, सीमाओं को तोड़, मारी एक छलांग जैसे आज नहीं तो कभी नहीं ड्रिंक्स काउन्टर की तरफ भागे सभी, परहेजी बंदर भागे स्वीट काउन्टर पर दबाने रसगुल्ले और हलवा गाजर का, नादान हैं सब नहीं जानते, उनपर नजर का पहरा है। राज बड़ा गहरा है। बात करते करते भी महिलायें गिन लेती हैं पेग जो उनके बंदर ने डकारे हैं गिन लेती हैं मिठाईयां जो परहेजियों ने दबाई हैं गिन लेती हैं गुलाटियाँ जो उनके बंदरों ने मारी हैं अकेले मिलें तो हिसाब हो बंदर से आदमी बनाने की कवायद हो। कहते हैं, बुड्ढा बंदर कभी गुलाटी नहीं भूलता उम्र बीत जाती है, पत्नी की अपने बंदर को साधते साधते। जानती तो है कितना भी उलटे कितना भी घुलटे जाएगा कहाँ ? आएगा, उसका बंदर उसी के पास।